Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जघन्य अपराध के मामलों में नाबालिग आरोपियों को स्वतः जमानत नहीं दी जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर मामले में तथ्यों और परिस्थितियों को देखकर ही निर्णय लिया जाएगा। यह फैसला किशोर न्याय अधिनियम की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय:
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय भविष्य के मामलों में मिसाल बन सकता है और गंभीर अपराधों में सख्ती बढ़ा सकता है।